कथा कही सब तेहिं अभिमानी

चौपाई ५, दोहा ६२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी॥ तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महा महा जोधा संघारे॥ ५ ॥

अर्थ

उस अभिमानी (रावण) ने उससे जिस प्रकार से वह सीता को हर लाया था [तबसे अबतक की] सारी कथा कही। [फिर कहा--] हे तात! वानरों ने सब राक्षस मार डाले; बड़े-बड़े योद्धाओं का भी संहार कर डाला।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।

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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश