जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं

चौपाई २, दोहा ६६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं॥ मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा॥ २ ॥

अर्थ

भगवान् [इसके द्वारा] जगत् को पवित्र करने वाली वह कीर्ति फैलायेंगे जिसे गा-गाकर मनुष्य भवसागर से तर जायेंगे। मूर्च्छा जाती रही, तब मारुति हनुमानजी जागे और फिर वे सुग्रीव को खोजने लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।

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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति