उमा करत रघुपति नरलीला
उमा करत रघुपति नरलीला
चौपाई १, दोहा ६६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
उमा करत रघुपति नरलीला। खेल गरुड़ जिमि अहिगन मीला॥ भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई॥ १ ॥
अर्थ
(शिवजी कहते हैं--) हे उमा! श्रीरघुनाथजी वैसे ही नरलीला कर रहे हैं जैसे गरुड़ सर्पों के समूह में मिलकर खेलता हो। जो भौंह के इशारे मात्र से (बिना परिश्रम के) काल को भी खा जाता है, उसे कहीं ऐसी लड़ाई शोभा देती है?
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति