जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं
जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं
चौपाई ७, दोहा ७५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं॥ जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई॥ ७ ॥
अर्थ
यदि मैं आज उसे बिना मारे आऊँ, तो श्रीरघुनाथजी का सेवक न कहलाऊँ। यदि सौ शंकर भी उसकी सहायता करें, तब भी श्रीरघुवीर की दुहाई है; आज मैं उसे मार ही डालूँगा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।
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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना