जब कीन्ह तेहिं पाषंड
जब कीन्ह तेहिं पाषंड
छन्द १, दोहा १०१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
छन्द पाठ
जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड। बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच॥ १ ॥
अर्थ
जब उसने पाखण्ड रचा, तब भयंकर जीव प्रकट हो गये। बेताल, भूत और पिशाच हाथों में धनुष-बाण लिये प्रकट हुए।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का छन्द १, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।
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राम-रावण युद्ध, रावण वध