देखि महा मर्कट प्रबल रावन कीन्ह

दोहा १०० · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

देखि महा मर्कट प्रबल रावन कीन्ह बिचार। अंतरहित होइ निमिष महुँ कृत माया बिस्तार॥ १०० ॥

अर्थ

वानरों को बड़ा ही प्रबल देखकर रावण ने विचार किया और अन्तर्धान होकर क्षणभर में उसने माया फैलाई।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का दोहा १०० है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।

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त्रिजटा-सीता संवाद