इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही
चौपाई ३, दोहा ८६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही॥ अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही॥ ३ ॥
अर्थ
इधर देवताओं ने स्तुति की कि हे श्रीरामजी! इसने हमको दारुण दुःख दिये हैं। अब आप इसे [अधिक] न खेलाइये। जानकीजी बहुत ही दुखी हो रही हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।
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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध