देव बचन सुनि प्रभु मुसुकाना

चौपाई ४, दोहा ८६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देव बचन सुनि प्रभु मुसुकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना॥ जटा जूट दृढ़ बाँधें माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे॥ ४ ॥

अर्थ

देवताओं के वचन सुनकर प्रभु मुसकराये। फिर श्रीरघुवीर ने उठकर बाण सुधारे। मस्तक पर जटाओं के जूड़े को कसकर बाँधे हुए हैं, उसके बीच-बीच में पुष्प गूँथे हुए शोभित हो रहे हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।

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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध