चली तमीचर अनी अपारा

चौपाई २, दोहा ८६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा॥ प्रभु सन्मुख धाए खल कैसें। सलभ समूह अनल कहँ जैसें॥ २ ॥

अर्थ

निशाचरों की अपार सेना चली। उसमें बहुत-से हाथी, रथ, पैदल और घुड़सवार थे। वे दुष्ट प्रभु के सामने कैसे दौड़े, जैसे पतंगों के समूह अग्नि की ओर [जलने के लिये] दौड़ते हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मूर्च्छा, उसके यज्ञ के विध्वंस और राम-रावण के प्रचंड युद्ध का वर्णन है।

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रावण की मूर्च्छा, राम-रावण युद्ध