मेघनाद कै मुरछा जागी

चौपाई १, दोहा ७५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

मेघनाद कै मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी॥ तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा॥ १ ॥

अर्थ

मेघनाद की मूर्छा जागी, [तब] पिता को देखकर उसे अति लाज लगी। तुरंत वह गिरिवर की कंदरा में गया। मैं अजय (अजेय होनेको) यज्ञ करूँ, ऐसा मन में धारण किया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना