इहाँ प्रात जागे रघुराई
इहाँ प्रात जागे रघुराई
चौपाई १, दोहा १७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई॥ कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई॥ १ ॥
अर्थ
यहाँ (सुबेल पर्वत पर) प्रातःकाल श्रीरघुनाथजी जागे और उन्होंने सब मन्त्रियों को बुलाकर सलाह पूछी कि शीघ्र बताइये, अब क्या उपाय करना चाहिये? जाम्बवान ने श्रीरामजी के चरणों में सिर नवाकर कहा--।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।
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मंदोदरी का राम-महिमा कथन