हम देवता परम अधिकारी
हम देवता परम अधिकारी
चौपाई ६, दोहा ११० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी॥ भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे॥ ६ ॥
अर्थ
हम देवता परम अधिकारी होकर भी स्वार्थपरायण हो आपकी भक्ति को भुलाकर निरन्तर भवसागर के प्रवाह (जन्म-मृत्यु के चक्र) में पड़े हैं। अब हे प्रभो! हम आपकी शरण में आ गये हैं, हमारी रक्षा कीजिये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।
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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा