यह खल मलिन सदा सुरद्रोही
यह खल मलिन सदा सुरद्रोही
चौपाई ५, दोहा ११० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही॥ अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरें मन बिसमय आवा॥ ५ ॥
अर्थ
यह दुष्ट मलिनहृदय, देवताओं का नित्य शत्रु, काम, लोभ और मद के परायण तथा अत्यन्त क्रोधी था। ऐसे अधमों के शिरोमणि ने भी आपका परमपद पा लिया। इस बात का हमारे मन में आश्चर्य हुआ।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ११० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।
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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा