हाहाकार करत सुर भागे

चौपाई ४, दोहा ९७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे॥ देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो॥ ४ ॥

अर्थ

देवता हाहाकार करते हुए भागे। [रावण ने कहा—] दुष्टो! मेरे आगे से कहाँ जा सकोगे? देवताओं को व्याकुल देखकर अंगद दौड़े और उछलकर रावण का पैर पकड़कर [उसे] पृथ्वी पर गिरा दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण की माया, राम द्वारा नाश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मायावी युद्धलीला और राम द्वारा उसका नाश का वर्णन है।

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रावण की माया, राम द्वारा नाश