अस्तुति करत देवतन्हि देखें

चौपाई ३, दोहा ९७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें॥ सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल॥ ३ ॥

अर्थ

देवताओं को श्रीरामजी की स्तुति करते देखकर रावण ने सोचा, मैं इनकी समझ में एक हो गया। [परन्तु इन्हें यह पता नहीं कि इनके लिये मैं एक ही बहुत हूँ] और कहा—अरे मूर्खो! तुम तो सदा के ही मेरे मरने वाले हो। ऐसा कहकर वह क्रोध करके आकाश पर [देवताओं की ओर] दौड़ा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण की माया, राम द्वारा नाश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मायावी युद्धलीला और राम द्वारा उसका नाश का वर्णन है।

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रावण की माया, राम द्वारा नाश