हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा

चौपाई ३, दोहा ९३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा॥ सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिसि गगन महि पाटे॥ ३ ॥

अर्थ

जब देवताओं ने हाहाकार किया, तब प्रभु ने क्रोध करके धनुष उठाया। और शत्रु के बाणों को हटाकर उन्होंने शत्रु के सिर काटे और उनसे दिशा-विदिशा, आकाश और पृथ्वी सब को पाट दिया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध