समर भूमि दसकंधर कोप्यो

चौपाई २, दोहा ९३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो॥ दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ॥ २ ॥

अर्थ

रणभूमि में रावण ने क्रोध किया और बाण बरसाकर श्रीरघुनाथजी के रथ को ढक दिया। एक दण्ड (घड़ी) तक रथ दिखलायी न पड़ा, मानो कुहरे में सूर्य छिप गया हो।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध