हा राम हा रघुनाथ

छन्द ६, दोहा १०१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ। एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि॥ ६ ॥

अर्थ

हा राम! हा रघुनाथ! पुकारते हुए सुभट अपने हाथ मलते हैं। इस प्रकार सकल बल तोड़कर उसने फिर कपट रचा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का छन्द ६, दोहा १०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध