गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा
गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा
चौपाई ४, दोहा १९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा॥ उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रोध बिसेषी॥ ४ ॥
अर्थ
अत्यन्त बलवान् बाँके वीर बालिपुत्र अंगद सभामें गये, वे मन में जरा भी नहीं झिझके। अंगद को देखते ही सब सभासद् उठ खड़े हुए। यह देखकर रावण के हृदय में बड़ा क्रोध हुआ।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद