भुजा बिटप सिर सृंग समाना

चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना॥ मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना॥ ३ ॥

अर्थ

भुजाएँ वृक्षों के और सिर पर्वतों के शिखरों के समान हैं। रोमावली मानो बहुत-सी लताएँ हैं। मुँह, नाक, नेत्र और कान पर्वत की कन्दराओं और खोहों के बराबर हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद