गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना
गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना
चौपाई ३, दोहा ९५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना॥ लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा॥ ३ ॥
अर्थ
रावण ने पूँछ पकड़ ली, हनुमानजी उसको साथ लिये हुए ऊपर उड़े। फिर लौटकर महाबलवान् हनुमानजी उससे भिड़ गये। दोनों समान योद्धा आकाश में लड़ते हुए एक-दूसरे को क्रोध करके मारने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण की माया, राम द्वारा नाश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की मायावी युद्धलीला और राम द्वारा उसका नाश का वर्णन है।
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रावण की माया, राम द्वारा नाश