गहेउ चरन गहि भूमि पछारा
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा
चौपाई ४, दोहा ६६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा॥ पुनि आयउ प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना॥ ४ ॥
अर्थ
उसने सुग्रीव का पैर पकड़कर उनको पृथ्वी पर पछाड़ दिया। फिर सुग्रीव ने बड़ी फुर्ती से उठकर उसको मारा। और तब बलवान सुग्रीव प्रभु के पास आये और बोले--कृपानिधान प्रभु की जय हो, जय हो, जय हो।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति