एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी
एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी
चौपाई ३, दोहा ९८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भागि चलहिं एक लातन्ह मारी॥ तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ॥ ३ ॥
अर्थ
कोई एक वानर नखों से शत्रु के शरीर को फाड़कर भाग जाते हैं, तो कोई उसे लातों से मारकर। तब नल और नील रावण के सिरों पर चढ़ गये और नखों से उसके ललाट को फाड़ने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “घोर युद्ध, रावण की मूर्छा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में घोर युद्ध में राम के प्रहारों से रावण की मूर्छा और वानर वीरों के पराक्रम का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
घोर युद्ध, रावण की मूर्छा