बालितनय मारुति नल नीला
बालितनय मारुति नल नीला
चौपाई २, दोहा ९८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला॥ बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा॥ २ ॥
अर्थ
बालिपुत्र अंगद, मारुति हनुमानजी, नल, नील, वानरराज सुग्रीव और द्विविद आदि बलवान् उस पर वृक्ष और पर्वतों का प्रहार करते हैं। वह उन्हीं पर्वतों और वृक्षों को पकड़कर वानरों को मारता है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “घोर युद्ध, रावण की मूर्छा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में घोर युद्ध में राम के प्रहारों से रावण की मूर्छा और वानर वीरों के पराक्रम का वर्णन है।
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घोर युद्ध, रावण की मूर्छा