एक बहोरि सहसभुज देखा

चौपाई ८, दोहा २४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा॥ कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा॥ ८ ॥

अर्थ

फिर एक रावण को सहस्रबाहु ने देखा, और उसने दौड़कर उसको एक विशेष प्रकार के जन्तु की तरह [समझकर] पकड़ लिया। तमाशे के लिये वह उसे घर ले आया। तब पुलस्त्य मुनि ने जाकर उसे छुड़ाया।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद