धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा

चौपाई २, दोहा १०३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा॥ गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी॥ २ ॥

अर्थ

धड़ प्रचण्ड वेग से दौड़ता है, जिससे धरती धँसने लगी। तब प्रभु ने बाण मारकर उसके दो टुकड़े कर दिये। मरते समय रावण बड़े घोर शब्द से गरजकर बोला--राम कहाँ हैं? मैं ललकारकर उनको युद्ध में मारूँ!।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध