दिन के अंत फिरीं द्वौ अनी
दिन के अंत फिरीं द्वौ अनी
चौपाई १, दोहा ७२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
दिन के अंत फिरीं द्वौ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी॥ राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा॥ १ ॥
अर्थ
दिन का अन्त होने पर दोनों सेनाएँ लौट पड़ीं। [आज के युद्ध में] योद्धाओं को बड़ी थकावट हुई; परन्तु श्रीरामजी की कृपा से वानरसेना का बल उसी प्रकार बढ़ गया जैसे घास पाकर आग बहुत बढ़ जाती है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति