निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज
निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज
दोहा ७१ · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
निसिचर अधम मलाकर ताहि दीन्ह निज धाम। गिरिजा ते नर मंदमति जे न भजहिं श्रीराम॥ ७१ ॥
अर्थ
[शिवजी कहते हैं--] हे गिरिजे! कुम्भकर्ण, जो नीच राक्षस और पाप की खान था, उसे भी श्रीरामजी ने अपना परमधाम दे दिया! अतः वे मनुष्य [निश्चय ही] मन्दबुद्धि हैं जो उन श्रीरामजी को नहीं भजते।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति” प्रकरण का दोहा ७१ है। इस प्रकरण में कुंभकर्ण के प्रचंड पराक्रम और श्रीराम के हाथों उसकी परमगति का वर्णन है।
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कुंभकर्ण युद्ध और उसकी परमगति