धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस

दोहा ३८ (क) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस। तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस॥ ३८ (क) ॥

अर्थ

दशशीश रावण धर्महीन, प्रभु के पद से विमुख और काल के वश में है। इसलिये हे कोसलाधीश! सुनिये, वे गुण रावण को छोड़कर आपके पास आ गये हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का दोहा ३८ (क) है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना