साम दान अरु दंड बिभेदा

चौपाई ५, दोहा ३८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा॥ नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए॥ ५ ॥

अर्थ

हे नाथ! वेद कहते हैं कि साम, दान, दण्ड और भेद-ये चारों राजा के हृदय में बसते हैं। ये नीति-धर्म के चार सुन्दर चरण हैं। ऐसा जी में जानकर नाथ के पास आए हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को धर्म, नीति और राम के अतुल बल का स्मरण, किन्तु रावण का अहंकारवश अस्वीकार का वर्णन है।

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मंदोदरी का रावण को पुनः समझाना