महिष खाइ करि मदिरा पाना

चौपाई १, दोहा ६४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना॥ कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा॥ १ ॥

अर्थ

भैंसे खाकर और मदिरा पीकर वह वज्रघात के समान गरजा। मद से चूर, रण के उत्साह से भरा कुम्भकर्ण किला छोड़कर चला। सेना भी साथ नहीं ली।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।

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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश