देहिं परम गति सो जियँ जानी
देहिं परम गति सो जियँ जानी
चौपाई ३, दोहा ४५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी॥ अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी॥ ३ ॥
अर्थ
ऐसा हृदय में जानकर वे उन्हें परम गति (मोक्ष) देते हैं। हे भवानी! कहो तो ऐसे कृपालु [और] कौन हैं? प्रभु का ऐसा स्वभाव सुनकर भी जो मनुष्य भ्रम त्यागकर उनका भजन नहीं करते, वे अत्यन्त मन्दबुद्धि और परम भाग्यहीन हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ