अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा

चौपाई ४, दोहा ४५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा॥ लंका द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहिं सिंधु दुइ मंदर जैसें॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामजी ने कहा कि अंगद और हनुमान किले में घुस गये हैं। दोनों वानर लंका में [विध्वंस करते] कैसे शोभा देते हैं, जैसे दो मन्दराचल समुद्र को मथ रहे हों।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

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युद्धारम्भ