भजु रघुपति करु हित आपना

चौपाई ३, दोहा ५६ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

भजु रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना॥ नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी का भजन करके तुम अपना कल्याण करो। हे नाथ! झूठी बकवाद छोड़ दो। नीलकमल के समान सुन्दर श्याम शरीर को अपने हृदय में रखो।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमान द्वारा सुषेण वैद्य को लाना, संजीवनी हेतु प्रस्थान, कालनेमि की माया का भेदन और मकरी-उद्धार का वर्णन है।

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हनुमान का संजीवनी के लिये प्रस्थान