चरित राम के सगुन भवानी

चौपाई १, दोहा ७४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी॥ अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी॥ १ ॥

अर्थ

हे भवानी! श्रीरामजी की इन सगुण लीलाओं के विषय में बुद्धि और वाणी के बल से तर्क (निर्णय) नहीं किया जा सकता। ऐसा विचार कर जो तत्त्वज्ञानी और विरक्त पुरुष हैं वे सब तर्क (शंका) छोड़कर श्रीरामजी का भजन ही करते हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना