चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन
चौपाई ३, दोहा ११७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन॥ नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही॥ ३ ॥
अर्थ
हे सखा विभीषण ! सुनो, विमान पर चढ़कर, आकाश में जाकर वस्त्रों और गहनों को बरसा दो। तब (आज्ञा सुनते) ही विभीषणजी ने आकाश में जाकर सब मणियों और वस्त्रों को बरसा दिया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा वानरों और भालुओं पर वस्त्र-आभूषण बरसाने और उनके हर्षपूर्वक धारण करने का वर्णन है।
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विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना