बहुरि बिभीषन भवन सिधायो

चौपाई २, दोहा ११७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो॥ लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा॥ २ ॥

अर्थ

फिर विभीषणजी महल को गये और उन्होंने मणियों के समूहों (रत्नों) से और वस्त्रों से विमान को भर लिया। फिर उस पुष्पक विमान को लाकर प्रभु के सामने रखा। तब कृपासागर श्रीरामजी ने हँसकर कहा--।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा वानरों और भालुओं पर वस्त्र-आभूषण बरसाने और उनके हर्षपूर्वक धारण करने का वर्णन है।

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विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना