चला कटकु प्रभु आयसु पाई
चला कटकु प्रभु आयसु पाई
चौपाई ५, दोहा ४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई॥ ५ ॥
अर्थ
प्रभु श्रीरामचन्द्रजी की आज्ञा पाकर सेना चली। वानर-सेना की विपुलता (अत्यधिक संख्या) को कौन कह सकता है?
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।
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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना