ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर

चौपाई ३, दोहा ५५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर॥ तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना॥ ३ ॥

अर्थ

व्यापक, ब्रह्म, अजेय, सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के ईश्वर और करुणा की खान श्रीरामचन्द्रजी ने पूछा-- लक्ष्मण कहाँ हैं? तब तक हनुमान्‌ उन्हें ले आये। छोटे भाई को [इस दशा में] देखकर प्रभु ने बहुत ही दुःख माना।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मणजी का मूर्च्छित होना का वर्णन है।

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लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार