धावहु मर्कट बिकट बरूथा

चौपाई ५, दोहा १ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा॥ सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा॥ ५ ॥

अर्थ

विकट वानरों के समूह (आप) दौड़ जाइये और वृक्षों तथा पर्वतों के समूहों को उखाड़ लाइये। यह सुनकर वानर और भालू हूहा करके और श्रीरघुनाथजी के प्रताप-समूह की जय पुकारते हुए चले।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।

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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना