बिषय मनोरथ पुंज कंज बन

छन्द ३, दोहा ११५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन॥ भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर॥ ३ ॥

अर्थ

विषयकामनाओं के समूहरूपी कमलवन के [नाश के] लिये आप प्रबल पाला हैं, आप उदार और मन से परे हैं। भवसागर [को मथने] के लिये आप मन्दराचल पर्वत हैं। आप हमारे परम भय को दूर कीजिये और हमें दुस्तर संसारसागर से पार कीजिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द ३, दोहा ११५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा