अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर

छन्द २, दोहा ११५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर॥ काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन॥ २ ॥

अर्थ

आप निर्गुण, सगुण, दिव्य गुणों के धाम और परम सुन्दर हैं। भ्रमरूपी अन्धकार के [नाश के] लिये प्रबल प्रतापी सूर्य हैं। काम, क्रोध और मदरूपी हाथियों के [वध के] लिये सिंह के समान आप इस सेवक के मनरूपी वन में निरन्तर निवास कीजिये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा” प्रकरण का छन्द २, दोहा ११५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की राम-स्तुति और इन्द्र द्वारा अमृत वर्षा से वानर-भालुओं का पुनर्जीवन का वर्णन है।

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देवताओं की स्तुति, इन्द्र की अमृत वर्षा