नाना बिधि प्रहार कर सेषा
नाना बिधि प्रहार कर सेषा
चौपाई ३, दोहा ५४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा॥ रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना॥ ३ ॥
अर्थ
शेषजी (लक्ष्मणजी) उसपर अनेक प्रकार से प्रहार करने लगे। राक्षस के प्राण मात्र शेष रह गये। रावणपुत्र मेघनाद ने मन में अनुमान किया कि अब तो प्राणसंकट आ बना, ये मेरे प्राण हर लेंगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध और मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मणजी का मूर्च्छित होना का वर्णन है।
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लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, शक्ति का प्रहार