आयसु पाइ दूत बहु धाए
आयसु पाइ दूत बहु धाए
चौपाई २, दोहा १९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए॥ अंगद दीख दसानन बैसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें॥ २ ॥
अर्थ
आज्ञा पाकर बहुत-से दूत दौड़े और वानरों में हाथी के समान अंगद को बुला लाये। अंगद ने रावण को ऐसे बैठे हुए देखा जैसे कोई प्राणयुक्त (सजीव) काजल का पहाड़ हो !
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद