भालु बलीमुख पाइ प्रकासा

चौपाई ३, दोहा ४७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा॥ हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे॥ ३ ॥

अर्थ

भालू और वानर प्रकाश पाकर श्रम और भय से रहित तथा प्रसन्न होकर दौड़े। हनुमान् और अंगद रण में गरज उठे। उनकी हाँक सुनते ही राक्षस भाग छूटे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।

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युद्धारम्भ