बेतपानि रच्छक चहु पासा

चौपाई ५, दोहा १०८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बेतपानि रच्छक चहु पासा। चले सकल मन परम हुलासा॥ देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए॥ ५ ॥

अर्थ

चारों ओर हाथों में छड़ी लिये रक्षक चले। सबके मनों में परम उल्लास है। रीछ-वानर सब दर्शन करने के लिये आये, तब रक्षक क्रोध करके उनको रोकने दौड़े।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।

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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा