बहु प्रकार भूषन पहिराए
बहु प्रकार भूषन पहिराए
चौपाई ४, दोहा १०८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए॥ ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही॥ ४ ॥
अर्थ
बहुत प्रकार के भूषण पहिराए और फिर एक रुचिर सिबिका सजाकर ले आये। सीताजी प्रसन्न होकर सुखधाम सनेही श्रीरामजी का स्मरण करके उस पर हर्ष के साथ चढ़ीं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।
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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा