बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन
बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन
दोहा १०९ (क) · लंकाकाण्ड
दोहा पाठ
बरषहिं सुमन हरषि सुर बाजहिं गगन निसान। गावहिं किंनर सुरबधू नाचहिं चढ़ीं बिमान॥ १०९ (क) ॥
अर्थ
देवता हर्षित होकर फूल बरसाने लगे। आकाश में डंके बजने लगे। किन्नर गाने लगे। विमानों पर चढ़ी अप्सराएँ नाचने लगीं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का दोहा १०९ (क) है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।
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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा