जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार

दोहा १०९ (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार। देखि भालुकपि हरषे जय रघुपति सुख सार॥ १०९ (ख) ॥

अर्थ

श्रीजानकीजी सहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी की अपरिमित और अपार शोभा देखकर रीछ-वानर हर्षित हो गये और सुख के सार श्रीरघुनाथजी की जय बोलने लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा” प्रकरण का दोहा १०९ (ख) है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा सीताजी को राम की कुशल सुनाना और सीताजी की अग्नि परीक्षा द्वारा पवित्रता प्रकट होने का वर्णन है।

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सीताजी को कुशल समाचार और अग्नि परीक्षा