खगपति सब धरि खाए माया नाग

दोहा ७४ (क) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ। माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ॥ ७४ (क) ॥

अर्थ

पक्षिराज गरुड़जी सब माया-नाग बरूथ को पकड़कर खा गये। माया से रहित होकर सब वानरों के झुंड हर्षित हुए।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना” प्रकरण का दोहा ७४ (क) है। इस प्रकरण में मेघनाद के मायावी युद्ध और रामजी के लीला से नागपाश में बँधने का वर्णन है।

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मेघनाद का राम को नागपाश में बाँधना